Updated : May 16, 2020 in Yojana

[COVID-19] कमर्शियल माइनिंग योजना | कैसे मिलेगा लाभ | पूरी जानकारी

कोयला कमर्शियल माइनिंग योजना | Commercial mining Yojana | उद्देश्य / लाभ / पात्रता | Commercial mining policy

 

कोविड-19 महामारी से शिथिल पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कमर्शियल माइनिंग योजना लागु होगी। इससे कई सुधार होगें। क्या है ये योजना आइए जानते हैं।

कमर्शियल माइनिंग योजना | Commercial mining Yojana

 

लॉकडाउन के चलते भारत में आत्मनिर्भर भारत के तहत आर्थिक पैकेज के चौथे चरण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोल सेक्टर में सुधार करने के लिए कमर्शियल माइनिंग योजना को शुरु करने की घोषणा की है। जिसके तहत कोयला से गैस बनाने पर सरकार दवारा इंसेटिव दिया जाएगा। जिससे सही दाम पर ज्यादा कोयला मिलेगा। इसके लिए 50 नए ब्लॉक तुरंत उपलब्ध कराए जाएंगे और इन ब्लॉक में तुरंत काम शुरू हो जाएगा। इस योजना से सरकार की मोनोपॉली खत्म होगी। कोल ट्रांसपोर्ट के लिए अलग से इंफ्रा तैयार किया जाएगा। इसके लिए सरकार दवारा 50 हजार करोड़ रुपये दिए जाएगें। यह धनराशी 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज के तहत मिलेगी। इस योजना के जरिए 500 माइनिंग ब्लॉक्स की नीलामी की जाएगी। जिससे माइनिंग लीज का ट्रांसफर होगा। उससे माइनिंग सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे खनन में वृद्धि होगी और रोजगार सृजन होगा। इसके अलावा एल्यूमिनियम इंडस्ट्री को भी इससे लाभ मिलेगा। बिजली की लागत कम होगी। खनन भी बढ़ेगा। इससे सालाना 40% उत्पादन बढ़ेगा और देश के उद्योगों को भी बल मिलेगा। 2023-24 तक कोयले का उत्पादन 1 बिलियन टन तक पहुंचेगा।

उद्देश्य | An Objective

कमर्शियल माइनिंग योजना का मुख्य उद्देश्य कोल सेक्टर में सुधार कर सरकार की मोनोपॉली खत्म करना है और वेरोजगार लोगों को रोजगार उपलव्ध करवाना है।        

पात्रता | Eligibility

  • अब कोई भी लगा सकेगा कोयला खदानों की बोली।
  • सरकार का एकाधिकार खत्म होगा।
  • पात्रता की बड़ी शर्तें नहीं होंगी।

लाभ | Benefits

  • कमर्शियल माइनिंग योजना से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।
  • इससे मुनाफा अधिक होगा।
  • इस योजना से सरकार की मोनोपॉली समाप्त होगी।
  • कोयला से गैस बनाने पर सरकार इंसेटिव देगी।
  • इससे सही और अचित दाम पर ज्यादा कोयला मिलेगा।
  • इस योजना के लिए 50 नए व्लॉक वनाए जाएगें।
  • इस योजना के लिए निलामी प्रक्रिया शुरु होगी, जहां पर कोई भी कोयला खदानों की बोली लगा सकता है।
  • इस योजना से रोजगार वढेगें।
  • इस योजना को सुचारु रुप से चलाने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएगें।

आशा करता हूं आपको इस आर्टीकल के दवारा सारी जानकारी मिल गई होगी। आर्टीकल अच्छा लगे तो कोमेंट और लाइक जरुर करें।

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