भारत के इस गांव (माणा) में पहुंचते ही मिट जाती है दरिद्रता/गरीवी|

भारत का आखिरी गांव माणा/ इस गांव में पहुंचते ही मिटती है गरीवी/ क्या है मान्यता आइए जानें

हर इन्सान चाहता है कि उसके पास धन-दौलत हो, और वो राजा-महाराजा की जिंदगी जिए। ये सपने हर कोई देखता है लेकिन ये सपने उन लोगों के ही पूरे होते हैं जो मेहनत करते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के वारे में वता रहे हैं जहां पर पहुंचते ही आदमी की

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आर्थिक दशा मजवुत हो जाती है।



भारत का आखिरी गांव माणा

ह्म आपको अपने ही देश में लेकर चलते हैं। आमतौर पर भारत में कुछ ऐसे मंदिर/पर्यटक स्थल या कुछ ऐसे स्थान हैं जो विल्कुल रहस्यमयी हैं। जिनके रहस्य को आजतक कोई नहीं जान पाया। भारत का ऐसा ही एक गांव है माणा जो उतराखंड के चमोली जिले में स्थित है। जिसे भारत का आखिरी गांव भी कहा जाता है।

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मान्यता है कि यहां पर आया हुआ हर कोई व्यकित आर्थिक स्थित से मजवुत हो जाता है। मतलव इस गांव मे पहुंचते ही व्यकित की गरीवी दूर हो जाती है। ये तो लोगों की मान्यता है कि ये गांव व्यकित को आर्थिक रुप से मजवुत वनाता है। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए ये गांव रहस्य से कम नहीं है। उन्होने यहां पे वहुत रिर्सच की लेकिन उन्हे कुछ हासिल नहीं हुआ।  

ऐसा क्या इस गांव मे जहां पर पहुंचते ही गरीवी दूर होती है

भारत के इस गांव को लेकर वहां के लोगों की अटूट आस्था है। कहा जाता है कि इस गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणिभद्र देव के नाम पर पड़ा था। डॉ. नंद किशोर के मुताबिक माणिक शाह नाम एक व्यापारी था जो शिव का बहुत बड़ा भक्त था। एक बार व्यापारिक यात्रा के दौरान उसका लुटेरों के साथ सामना हुआ। जिस दोरान माणिक शाह से लुटेरों ने सारा धन लुट लिया और उसका सर धड से अलग कर दिया। लेकिन इसके बाद भी उसकी गर्दन शिव का जाप करती रही। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव ने उसे वरदान दिया और  

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उसके गर्दन पर वराह का सिर लगा दिया। इसके बाद से ही माणा गांव में मणिभद्र की पूजा होने लगी। भगवान शिव ने माणिक शाह को वरदान देते हुए ये भी कहा कि माणा आने पर हर व्यक्ति की दरिद्रता/ गरीवी दूर होगी। व्यकित को उसकी परेशानियों/ विमारी/ पाप आदि से मुकित मिलेगी। डॉं नंदकिशोर के मुताबिक अगर मणिभद्र की बृहस्पतिवार को पैसे के लिए प्रार्थना की जाए तो अगले बृहस्पतिवार तक उस व्यकित को इसका फल जरुर मिलता है।

इसी गांव में ही गणेश जी ने व्यास ‌ऋषि के कहने पर महाभारत की रचना की थी। महाभारत काल के ग्रंथों मे इस स्थान को विशेष महत्व दिया गया है। इस स्थान के वारे में यह भी कहा जाता है कि पांडव यहीं से जीवित चल कर सवर्ग गए थे।

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उसी समय से इस स्थान को पवित्र माना जाने लगा।

इस गांव में आकर व्यकित को सभी प्रकार के श्राप से मुक्ति मिलती है क्योंकि इस गांव को श्रापमुक्त के नाम से भी जाना जाता है। इस गांव मे पहुंचकर व्यकित को शांति मिलती है।

अगर आप भी पैसों की तंगी से जुझ रहे हैं तो आप भी भारत के आखिरी गांव माणा में जरुर आएं। आपको यहां आकर सभी प्रकार के सुख और शांति का अनुभव होगा। इस गांव में देविय शकितयों की छत्र छाया है जो व्यकित को वुरी नजर से वचाती है और उसकी रक्षा करती है।  

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