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Updated : Jun 20, 2019 in Yojana

एक राष्ट्र एक चुनाव | लाभ | नुकसान | आवश्यकता | पूरी जानकारी

एक राष्ट्र एक चुनाव | One Nation One Election

वन नेशन वन इलेक्शन का प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पार्टी मेनिफेस्टो में पास किया है। 17 वीं लोकसभा चुनाव जीतने के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी “एक राष्ट्र एक चुनाव” के कानूनी प्रावधान, संवैधानिक संशोधन, सुविधाएँ, फायदे और नुकसान का अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाने की योजना बना रहे हैं। वन नेशन वन इलेक्शन की अवधारणा यह है कि केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभा में एक साथ चुनाव कराना चाहती है। मोदी 2.0 सरकार का दावा है कि एक साथ चुनाव से बड़ी मात्रा में धन, मैन पावर, सरकारी खर्च को कम करने, विकास कार्यों के लिए अधिक समय, पार्टी के खर्चों को कम करने, सुरक्षा बलों की बेहतर तैनाती की बचत होगी।

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एक राष्ट्र एक चुनाव क्या है | What is One Nation One Election?

भारत एक लोकतांत्रिक देश हैं जहाँ लोग वोट देकर अपने प्रतिनिधियों या नेताओं का चयन करते हैं। भारत में आजादी के बाद से लेकर अब तक कई तरीकों से चुनाव होते आये हैं। लेकिन इसमें चुनाव आयुक्त और राजनीतिक दलों के बहुत सारे व्यय शामिल होते हैं, और साथ ही इससे प्रोडक्टिव समय की बर्बादी भी होती है। इसी के चलते मोदी सरकार द्वारा एक अदभुत प्रस्ताव दिया गया है, जोकि ‘एक राष्ट्र एक चुनाव” है। इसके तहत देश में होने वाले सभी तरह के चुनाव जैसे लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव एवं लोकल बॉडीज आदि एक ही समय पर आयोजित किये जाएंगे। कानून आयोग द्वारा इस प्रस्ताव की जाँच की जा रही है, और इसके बारे में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ परामर्श भी किया गया है।

एक राष्ट्र एक चुनाव के लाभ | The benefits of a nation one election

  1. खर्च की बचत:- 5 साल में एक बार चुनाव करने से सरकारी खजाने पर खर्च का बोझ कम पड़ेगा। 2009 के लोकसभा चुवान में 1,100 करोड़ और 2014 के लोकसभा चुवान में 4,000 करोड़ रूपये खर्च हुआ था।
  2. चुनावी चक्र का अंत:- हर साल औसतन पांच से ज्यादा राज्यों के चुनाव होते रहते हैं। इसके कारण पार्टियों व EVM मशीनरी पर बहुत ज्यादा बोझ पड़ता है।
  3. सीमित आचार संहिता लागू:- कम अवधि के लिए आचार संहिता लागू होगी। जिससे सामान्य सरकारी कामकाज में बार-बार रुकावट नहीं आएगी। जबकि बार-बार चुनाव होने से इस तरह की बाधाएं ज्यादा आती हैं।
  4. भ्रष्टाचार पर लगाम:- लोकसभा एवं विधानसभाओं का चुवान एक साथ होने से चुनाव में होने वाले काले धन के प्रवाह पर रोक लगेगा।
  5. शिक्षा क्षेत्र कम बाधित:- बार-बार चुनाव कराने से शिक्षा क्षेत्र के काम-काज प्रभावित होते हैं। शिक्षकों को चुवान के कार्य में लगा दिया जाता हैं।
  6. आम जनजीवन में कम अवरोध:- चुनावी रैलियों से यातायात पर असर पड़ता है| जिससे आम लोंगो को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर बार-बार होने वाले चुनावों के बजाय एक बार में दोनों चुनाव होतें हैं तो इस तरह की दिक्कतो का सामना कम करना पड़ेगा।
  7. भागीदारी बढ़ेगी:- देश के बहुत से लोग रोजगार या अन्य वजहों से दुसरें जगहों पर रहतें हैं। अलग-अलग समय पर चुनाव होने के वजह से वे अपने मूल स्थान पर मतदान करने नही जातें हैं। अगर एक साथ चुनाव होगें तो, इनमें से बहुत सारे लोग एक बार में दोनों चुनाव होने के कारंण मतदान करने अपने मूल स्थान पर जा सकतें हैं।

एक राष्ट्र एक चुनाव के नुकसान | The Disadvantages of one nation one election

  1. क्षेत्रीय पार्टियों के लिए संकट:- चुनाव जीतने के लिए बड़े राष्ट्रीय पार्टीयां भारी पैमाने पर संसाधन झोकेंगे, इन संसाधनों का मुकाबला करना क्षेत्रीय दलों के बस की बात नहीं होगी।
  2. क्षेत्रीय मुद्दों पर राष्ट्रीय मुद्दों का दबदबा:- चुनावों के दौरान देश की बड़ी राष्ट्रीय पार्टियाँ राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को लेकर मैदान पर उतरेंगीं। ऐसे में क्षेत्रीय मुद्दे कहीं गुम हो जाएंगे।
  3. देश में खतरे का आशंका:- सुरक्षाबलों को भी चुनाव कार्य में लगाना पड़ता है, जबकि देश की सीमाएँ संवेदनशील बनी हुई है.इस कारण आतंकवादी हमले होने का आशंका बढ जाता है।
  4. चुनाव परिणाम विलंब से:- लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करने में सबसे बड़ा पेंच यह हैं कि,चुनाव परिणाम आने में विलम्ब होगा।
  5. व्यक्ति केन्द्रित की आशंका:- लोकसभा एवं विधानसभाओं का चुनाव एक साथ होने से राष्ट्रीय पार्टियाँ प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करके चुनाव में आ सकती है। ऐसे में पूरा चुनावी अभियान उस व्यक्ति के आसपास केन्द्रित रह सकता है। लोग जिस व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहेगा। उसी की पार्टी के पक्ष में विधानसभा चुनाव में वोट देंगा।

क्या एक राष्ट्र एक चुनाव को लागू करने की आवश्यकता है| What Needed To Implement One Nation One Election?

संसद के ऊपरी और निचले सदनों से वन नेशन वन इलेक्शन के प्रस्ताव को पारित करने के बाद, केंद्र सरकार द्वारा कई संवैधानिक संशोधन और कानूनी प्रावधान किए जाएंगे। उसके बाद ही भारत में एक साथ चुनाव शुरू किए जाएगें।

ज्यादातर पार्टियों से मिला समर्थन । Support received from most parties

सर्वदलीय बैठक के बाद सरकार द्वारा दावा किया गया था कि ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ को ज्यादातर पार्टियों को समर्थन मिला है। साथ ही में यह भी बताया गया था कि इस पर सभी पक्षों के साथ चर्चा करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। संसद भवन के परिसर में हुई बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी समिति का गठन करेंगे, जो तय समय में सभी पक्षों के साथ बातचीत करके रिपोर्ट देगी। वहीं कई दल ऐसी भी थे जिन्होंने इस चर्चा में हिस्सा नहीं लिया था।

आशा करता हूं आपको इस आर्टीकल में सारी जानकारी मिल गई होगी। अगर आर्टीकल अच्छा लगे तो कोमेंट और लाइक जरुर करें।

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